होर्मुज संकट के बीच भारत के दो LPG जहाज सुरक्षित निकले, दुनिया रह गई हैरान

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की सख्ती के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी से लदे भारत के दो बड़े जहाज जल्द ही गुजरात के तट पर पहुंचने वाले हैं। इनमें से एक जहाज शिवालिक आज दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा। दूसरा जहाज नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर करीब 92 हजार 712 टन एलपीजी लदा हुआ है। खास बात यह है कि ये जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे जो मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। ऐसे में इन जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
ईरान की सख्त चेतावनी के बावजूद निकले भारतीय जहाज
मिडिल ईस्ट में संघर्ष तेज होते ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की एक बूंद भी गुजरने नहीं देगा। इस बयान के बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई थी क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। भारत समेत कई देशों के जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। लेकिन अब भारत के दो जहाजों के सुरक्षित निकलकर गुजरात पहुंचने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान खींच लिया है। इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारत ने कूटनीति के जरिए अपने हितों की रक्षा करने में सफलता हासिल की है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताई कूटनीतिक रणनीति
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने पहुंचे हैं। यहां उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में इस मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह लगातार ईरान से बातचीत कर रहे हैं और इस संवाद के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए बेहतर यही है कि वह तर्क और समन्वय के जरिए समाधान निकाले। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस प्रक्रिया से अन्य देशों को भी फायदा मिलता है तो यह पूरी दुनिया के लिए अच्छा होगा। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने भी संकेत दिया था कि ईरान उन देशों से बातचीत के लिए तैयार है जो अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग को लेकर चर्चा करना चाहते हैं।
भारत और ईरान के रिश्तों ने आसान किया रास्ता
एस जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई स्थायी या सामूहिक समझौता नहीं किया गया है। हर जहाज की आवाजाही अलग स्थिति के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बदले में ईरान को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया है। जयशंकर के मुताबिक भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और यही भरोसा इस कठिन परिस्थिति में काम आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष को भारत दुर्भाग्यपूर्ण मानता है और शांति का समर्थन करता है। हालांकि अभी कई भारतीय जहाज इस क्षेत्र में मौजूद हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए बातचीत जारी रहेगी।